Pages

Wednesday, 7 March 2012

अनुभव !!!!!!!!!!!!!!!

दुःख न आता तो ,सुख का अनुभव कहाँ होता ।
वियोग के बाद सयोंग का , आनंद कहाँ होता ।।
हानी न होती तो लाभ का मूल्य कहाँ होता ।
अभाव की बाद उपलब्धियों  का हर्ष कहाँ होता ।।
तिरस्कार के बाद सम्मान का अहसास कहाँ होता ।
रात के बाद प्रभात का उल्लास कहाँ होता ।।
राग द्वेष अभिमान के प्रपंच में हम जीते हैं ।
अपने कृत्यों का दोष , हम इश्वर को देते है ।।
जीवन के सुख-दुःख में,उसका आशीर्वाद छुपा होता है ।
अहंकार में दुबे हुए प्राणी को ज्ञान कहाँ होता ।।

No comments:

Post a Comment